भारतीय भाषा दर्शन की भूमिका

Authors

  • डॉ कृष्ण चंद पांडेय Author

Abstract

वेदांगभूत िन का कथन है - वचे: उयते अनया इित वाक् अथात् िजससे बोला जाय, वह वाक् है। यहाँ यह प है क िन कार ने वाक् के प म वाणी अथवा भाषा के भौितक अथवा ावहारक प को ही िलया है। कतु भारतीय भाषा चतन के मूल उस वेद म वाक् के भौितक प प के साथ-साथ उसके आयािमक प का, उसके सां ावहारक प के साथ-साथ पारमाथक का तथा उसके आिधभौितक, आिधदैिवक और आयािमक सभी प , प और तर भेद का प ता, सू मता और िवशदता के साथ का ामक भाषा म ापक िन पण िमलता है।

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Published

2022-01-01

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How to Cite

भारतीय भाषा दर्शन की भूमिका. (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(7), 5489-5492. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/7101