बौद्ध धर्म में वेदना का स्वरूप
Abstract
सित-स्मृित का बौद्ध साधना पद्धित में अित िविशष्ट स्थान है । भगवान बुद्ध ने 45 वषोर्ं के अपने सुदीघर् देशना-काल में इसका बहुश: उल्लेख एवं इसके महत्व का भूिरश: प्रितपादन िकया है। पािल िनकायों में नाना स्थानों पर इसकी चचार् िमलती है- कहीं संिक्षप्त, कहीं दीघर्, परंतु दीघिनकाय के ‘महासितपट्ठानसुत्त’ में तथा मिज्झमिनकाय के ‘सितपट्ठानसुत्त’ में इसकी िवस्तृत वैज्ञािनक चचार् िमलती ह







