बौद्ध धर्म में वेदना का स्वरूप

Authors

  • डॉ कृष्ण चंद पांडेय Author

Abstract

सित-स्मृित का बौद्ध साधना पद्धित में अित िविशष्ट स्थान है । भगवान बुद्ध ने 45 वषोर्ं के अपने सुदीघर् देशना-काल में इसका बहुश: उल्लेख एवं इसके महत्व का भूिरश: प्रितपादन िकया है। पािल िनकायों में नाना स्थानों पर इसकी चचार् िमलती है- कहीं संिक्षप्त, कहीं दीघर्, परंतु दीघिनकाय के ‘महासितपट्ठानसुत्त’ में तथा मिज्झमिनकाय के ‘सितपट्ठानसुत्त’ में इसकी िवस्तृत वैज्ञािनक चचार् िमलती ह

Published

2021-01-01

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बौद्ध धर्म में वेदना का स्वरूप. (2021). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 10(4), 1432-1443. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/3615