आहार एवं पोषण की परम्परागत भारतीय दृष्टि
Abstract
वर्तमान समय में जब मानव जीवन भागदौड़, तनाव, प्रदूषण और अनियमित जीवनशैली से प्रभावित है, ऐसे में सात्विक भोजन का महत्त्व और अधिक बढ़ गया है। आज के समय में लोग जहाँ मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं, ऐसे में सात्विक आहार एक प्राकृतिक औषधि की तरह कार्य करता है। यह भोजन शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। सात्विक भोजन न केवल शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, बल्कि मन को भी शांति प्रदान करता है। श्रीमद्भगवद्गीता जीवन के तीन गुणों सत्त्व,रज,तम के आधार पर आहार की शुद्धता का गूढ़ ज्ञान देती है। सात्विक आहार को आत्मिक उन्नति, मानसिक शांति और स्वास्थ्य का स्रोत बताकर वह जीवन के संतुलन की राह दिखाती है।





