विदर्भ मे जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान फसल संरचना {पैटर्न} मे हुए बदलाव का अध्ययन
Abstract
वर्तमान युग विज्ञान का युग है, और इस युग में आधुनिक तकनीक, विभिन्न उपकरण, रसायन और भौतिक साधनों का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसके कारण देश के वातावरण और जलवायु में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इसका विदर्भ के वातावरण और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, और भविष्य में भी इसका प्रभाव बढ़ने की संभावना है। परिणामस्वरूप, पिछले दो दशकों से महाराष्ट्र और विदर्भ के कई किसानों को कई संकटों का सामना करना पड़ रहा है। सूखा, फसल की विफलता और विभिन्न बीमारियों का प्रकोप कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरकता और उत्पादकता लगातार कम हो रही है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इसलिए, बदलते मौसम के अनुसार कृषि फसल संरचना में बदलाव करके किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक हो गया है। विदर्भ में बदलते मौसम का किसानों और उनकी आय पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। इसके कारण किसान की आय कम हो रही है और वे कर्जदार हो रहे हैं। जलवायु में लगातार बदलाव के कारण, कभी सूखा तो कभी अत्यधिक बारिश होती है, जिससे कृषि उत्पादन तेजी से घट रहा है। वातावरण {मौसम} में बदलाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिस पर मनुष्य पूरी तरह से नियंत्रण नहीं कर सकता। लेकिन, इन बदलावों के लिए मनुष्य खुद ही जिम्मेदार है और इसलिए उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। बदलते मौसम के अनुसार उपलब्ध भूमि में में उचित बदलाव करके, खेतों में फसल चक्र योजना का उपयोग और विभिन्न फसलों की खेती करके कृषि उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए कृषि-पूरक व्यवसाय और आधुनिक कृषि पद्धतियों का उपयोग करके किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना समय की मांग है। तभी भारतीय किसान, और देश आत्मनिर्भर बन सकता है।







