रामचरित मानस में लोकमाल की भावना

Authors

  • हसनखान का कुलकर्णी Author

Abstract

गोस्वामी तुलसीदास राम भक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं। इनका जन्म वि. संवत 1589 (सन 1532 ई.) में उत्तर प्रदेश के राजापुर गांव में हुआ था। तुलसी बाबा नरहरी दास के मार्ग दर्शन में राम भक्ति मार्ग को अपनाया "रामचरित मानस", जानकी मंगल, पार्वती मंगल, बरवा रामायण, विनय पत्रिका, आदि राम भक्ति के काव्य हैं इनका श्रेष्ठ काव्य हा इनका देहांत वि.संवत 1680 (1623 ई.) में हुआ। 'रामचरितमानस' की काथा को वाल्मिकी रामायण, भागवत पुराण, वेद आदि ग्रंथों से ग्रहण की गई हा महाभारत से शब्व-वष्षण्वों के विग्रह तथा उपशम की उक्तियाँ, 'श्रीमदभागवत' से वर्षा एवं शरद ऋतुओं के वर्न, वाल्मिकी रामायण से 'रामकथा' और हनुमान नाटक से मुद्रिका प्रसंग, 'आध्यात्म रामायण' से राम का अलौकिक रूप ग्रहण किए हैं। इन सभी घटनाओं को

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Published

2021-01-01

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रामचरित मानस में लोकमाल की भावना. (2021). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 10(4), 1370-1373. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/3610