अब्दुल बिस्मिल्लाह के साहित्य में मुस्लिम समाज की शैक्षिक स्थिति

Authors

  • आसिफा महम्मद शेख Author

Abstract

शिक्षा के द्वारा मानव ने अपनी बौद्धिक (मानसिक), सामाजिक और आध्यात्मिक प्रगति की है। इस्लाम धर्म में भी शिक्षा का आदेश दिया गया है। इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरान का पहला शब्द ही 'इकरा' जिसका अर्थ है पढ़ो। मुस्लिम समाज में पारंपारिक रूप से चलीं आ रही ही मदरसा पद्धति आज भी कायम है। आधुनिक युग में शिक्षा प्रदान करने का कार्य शिक्षा संस्थाओं द्वारा औपचारिक रूप से किया जाने लगा है। मदरसे में धार्मिक शिक्षा दी जाती है, जिससे मुस्लिम बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में अन्य समुदाया से पीछे है। इस समुदाय में बड़े पैमाने पर फैली गरीबी और बेरोजगारी इस के लिए जिम्मेदार है। सच्चर कमेटी रिपोर्ट भी बताती है कि," भारतीय मुसलमान शिक्षा के मामले में लगभग हर स्तर पर पिछड़ा हैं। उनकी साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। प्राथमिक शिक्षा के बाद स्कूल छोड़ देने वाले मुस्लिम बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसी कारण स्नातक तथा स्नानोकोत्तर पढ़ने वाले मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात काफी कम है।"1मुस्लिम लेखकों की कहानियों में शिक्षा को लेकर स्पष्ट रूप से नज़र आती है कि मुस्लिम समाज के निम्नस्तर शिक्षा का पूर्णतः अभाव है। अशिक्षा के कारण यह वर्ग बेरोजगारी, भूखमरी, अस्वास्थ्य और गरीबी जैसी समस्याओं से भीड़ रहा है। अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपने साहित्य में शिक्षा और उच्च शिक्षा, स्त्री शिक्षा आदि का चित्रण किया है।

Downloads

Published

2023-01-01

Issue

Section

Articles

How to Cite

अब्दुल बिस्मिल्लाह के साहित्य में मुस्लिम समाज की शैक्षिक स्थिति. (2023). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 12(1), 6540-6545. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/2376