आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवा पीढ़ी का व्यक्तित्व निर्माण

Authors

  • डॉ राकेश कुशवाहा Author

Abstract

आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवा पीढ़ी का व्यक्तित्व निर्माण आज के बदलते सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में अत्यंत प्रासंगिक विषय है। यह शोध सारांश इस बात पर केंद्रित है कि आध्यात्मिक शिक्षा युवाओं में नैतिक मूल्यों, आत्म-अनुशासन, सहिष्णुता एवं आत्मबोध के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में भौतिकवाद और प्रतिस्पर्धा के बढ़ते प्रभाव के कारण युवाओं में तनाव, असंतुलन और मूल्यहीनता की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जिसे आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है। आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति को केवल धार्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे जीवन के उद्देश्य, कर्तव्य और आत्म-साक्षात्कार की ओर प्रेरित करती है। इसके माध्यम से युवाओं में सकारात्मक सोच, धैर्य, करुणा और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। योग, ध्यान एवं नैतिक शिक्षाओं के समावेश से युवा अपने भीतर की क्षमताओं को पहचान पाते हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व को बेहतर ढंग से निभाते हैं। निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि आध्यात्मिक शिक्षा युवा पीढ़ी के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में एक सशक्त साधन है, जो उन्हें न केवल सफल बल्कि संवेदनशील और आदर्श नागरिक बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

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Published

2022-01-01

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How to Cite

आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवा पीढ़ी का व्यक्तित्व निर्माण. (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(10), 7787-7797. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/11553