कृषि विकास में वित्तीय संस्थानों की भूमिका: नीतियाँ और प्रथाएँ

Authors

  • केशर सिंह डोडवे Author
  • डॉ. सुधा पाण्डेय Author

Abstract

कृषि विकास में वित्तीय संस्थानों की नीतियों और प्रथाओं का विश्लेषण करने के लिए आवश्यक है कि हम पहले परिचय के महत्व को समझें। कृषि क्षेत्र, जो विश्व के कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, आर्थिक स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में वित्तीय संस्थानों की भूमिका काफी वृहद है, क्योंकि ये छोटे और मध्यम किसानो को ऋण और तकनीकी सहायता प्रदान कर उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हैं। कृषि विकास में निवेश की विशिष्ट नीतियाँ, जैसे कि अनुदान, कम ब्याज दर वाले ऋण, और कृषि बीमा योजनायें, किसानो को वित्तीय सुरक्षा देने के साथ-साथ उनके आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पारिस्थितिकी, सामाजिक और आर्थिक कारकों के साथ समन्वय स्थापित कर कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। इस अनुक्रम में, हम इन नीतियों के कार्यान्वयन के प्रभाव का विश्लेषण करेंगे, जिससे कृषि विकास में वित्तीय संस्थानों की भूमिका को समझा जा सके।

Published

2022-01-01

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Articles

How to Cite

कृषि विकास में वित्तीय संस्थानों की भूमिका: नीतियाँ और प्रथाएँ. (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(9), 6166-6177. https://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/10406