भारत की आध्यात्मिक विरासत स्वरूप उत्तराखण्ड की लोक चित्रकला 'ऐपण' का विशेष महत्व
Abstract
भारत एक बहुरंगीय परम्परा संस्कृति का देश है। इसके ये विभिन्न रंग यहाँ की संस्कृति, विचारधारा, दर्शन एवं प्राचीन परम्पराओं की धरोहर में देखने को मिल जाते हैं। भारत का यही रूप वि व में इसे अन्य देशों की संस्कृति की तुलना में अधिक विशिष्ट बनाता है। भारत की संस्कृति का आधार हमेशा से ही धर्म रहा है, जिसने सदैव सदव्यवहार, सदाचरण, सदविचार, समन्वय को ही अपना आधार बनाया है। धर्म और आध्यात्म को समझने के लिये प्रतीक चिन्हों ने अपना विशेष योगदान दिया है मनुष्य के जीवन में कई ऐसे भाव उत्पन्न होते हैं जिन्हें व्यक्त करना, लिखकर बताना या बोलकर बताना कठिन होता है। तब वहाँ पर मनुष्य अपने भावों को प्रतीक के रूप में सामने रखने लगा जिससे उसके के मन के भाव समझना आसान हो गया। इन प्रतीक चिन्हों को दर्शाने के लिये लोक चित्रों की सहायता ली जाती है। उत्तराखण्ड के लोक चित्र ऐपण में भी कई प्रतीक चिन्ह दर्शाये जाते हैं। ऐपण उतराखण्ड के कुमाऊँ की विशेष कला है जिसे प्रत्येक मंगल अवसर पर बनाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। उत्तराखंड के कुमाऊं में बनाए जाने वाली ऐपण विधा सदैव ही अपने परंपरागत वि वासों, आस्थाओं, रहस्यात्मक संकेतों पर आधारित रही है। इस विधा में बनाए गये चित्रों का विषय धार्मिक एवं सामाजिक रहता है जिसमें मुख्य रूप से देवी-देवताओं एवं प्रकृति से संबंधित चित्रों को चित्रित किया जाता है। यह वह भूमि है जहाँ युगों-युगों से ऋषि मुनियों का आवास रहा है। मेरे द्वारा किये गये इस लघु शोध कार्य में इस लोक कला ऐपण पर विशेष प्रकाश डाला गया है।







