हिन्दी साहित्य में पर्ाावरण चेतना

Authors

  • डॉ आभा स िं ह Author

Abstract

ासहत्य और पर्ाधवरण दो सभन्न उपर्ोग वाले शब्द होने के बाद भी कहीिं ना कहीिं अपने अिंतर िं बिंर्ोिं को जीते है। जहािं एक ओर ासहत्य मानवीर् भावनाओिं और मूल्ोिं का पोषक और िं वाहक है वहीिं दू री ओर पर्ाधवरण का आशर् उ बाहरी पररवेश े है जो मानव अपने आ पा देखता है,तैर्ार करता है। ासहत्य और पर्ाधवरण मनुष्य के बाहरी और भीतरी दोनोिं पररवेश के सलए आवश्यक है।

Downloads

Published

2022-01-01

Issue

Section

Articles

How to Cite

हिन्दी साहित्य में पर्ाावरण चेतना. (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(12), 19339-19343. http://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/14448