स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय साहित्या का अवदान (स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय उपन्यासकारों का योगदान)

Authors

  • डॉ. एल पी लमाणी Author

Abstract

स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास का वह युग है, जो पीड़ा, कड़वाहट, दंभ, आत्मसम्मान, गर्व, गौरव तथा सबसे अधिक शहीदों के लहू को समेटे है। स्वतंत्रता के इस महायज्ञ में समाज के प्रत्येक वर्ग ने अपने-अपने तरीके से बलिदान दिए। इस स्वतंत्रता के युग में साहित्यकार और लेखकों ने भी अपना भरपूर योगदान दिया। अंग्रेजों को भगाने में कलमकारों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। क्रांतिकारियों से लेकर देश के आम लोगों तक के अंदर लेखकों ने अपने शब्दों से जोश भरा। प्रेमचंद की ‘रंगभूमि', ‘कर्मभूमि' उपन्यास हो या भारतेंदु हरिश्चंद्र का ‘भारत-दर्शन' नाटक या जयशंकर प्रसाद का 'चंद्रगुप्त'- सभी देशप्रेम की भावना से भरी पड़ी है।

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2022-01-01

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स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय साहित्या का अवदान (स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय उपन्यासकारों का योगदान). (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(12), 15645-15651. http://www.ijfans.org/index.php/Journal/article/view/14076